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रविवार, 12 अक्टूबर 2014
शुक्रवार, 1 अगस्त 2014
शनिवार, 14 सितंबर 2013
हमारी हिंदी
बेचारी हमारी हिंदी, कितने जुल्मों सितम झेलती है ,उसके चाहने वालों पर कितना कहर बरपाया जाता है ये तो हम आप अच्छी तरह से जानतें हैं ,इसकी लड़ाई तो अपनों से ही ज्यादा है ……… कभी क्षेत्रवाद का दंश झेलती है तो कभी विदेशी भाषा के सामने अपने ही हमारी भाषा को नीचा दिखाते है ,आखिर क्यों ? आज हिंदी भाषा में पढाई करने वाले बच्चे अपने को कुंठित महसूस करतें है । बहुत ज्यादा विस्तार में जायेंगे तो शायद चर्चा बहुत बड़ी हो जाए……………………एक छोटी सी बात ! इस देश में रहने वाले कितने लोग इस देश की भाषा में दस्तखत करना पसंद करतें है और ये बात अपने दिल पर हाथ रखकर कहिये ,आपको इस देश की मिटटी की कसम । मैं अपने एक छोटे से अनुभव के बारे में बताता हूँ कि महीने में एक बार संभवतः मुझे एक समारोह में जाना पड़ता है और सभी को अपनी उपस्थिति एक जगह दर्ज करानी पड़ती है । आप विश्वास नहीं करेंगे एक - दो लोगों को छोड़कर और सभी लोगों के दस्तखत सबकी प्यारी दुलारी भाषा अंग्रेजी में होतें है ………………। अगर कोई काम करना है तो कल से नहीं बल्कि आज से ही करतें है और अभी से वो भी अपने दस्तखत हिंदी में करके । मैं १००% दावे से कहता हूँ कि आपको इतना सुकून मिलेगा कि जैसे कुछ खोया हुआ मिल गया ………………आनंद विक्रम ।
गुरुवार, 5 सितंबर 2013
गुरु ........
वो तो अंगूठा ही लिए
ये तो सब हर लीन्ही |
........anand
वो तो अंगूठा ही लिए
ये तो सब हर लीन्ही |
शनिवार, 11 मई 2013
आदरणीय,
पत्रिका के आगामी अंक को भी शीघ्र ही प्रकाशित करने की योजना है । अतः
रचनाकारों अध्येताओं से अनुरोध है कि वे अपनी रचनाएँ यथा कविता ,आलेख इत्यादि निम्न
पते पर शीघ्र प्रेषित करने कि कृपा करें ----------
सम्पादक करुणावती c/o श्री राधाकांत त्रिपाठी ,३२६ नई बस्ती कीडगंज इलाहाबाद -२११००३
अथवा मुझे ई -मेल भी कर सकतें हैं |
---आनंद विक्रम त्रिपाठी
रविवार, 7 अप्रैल 2013
करुणावती विमोचन की कुछ तस्वीरें .........
परम पूज्य डॉ० जय शंकर त्रिपाठी की स्मृति में प्रकशित "करुणावती" त्रैमासिक हिंदी साहित्य
की पत्रिका का प्रकाशन उनके स्नेहीजन एवं उनके साहित्य के प्रेमियों के साथ हम सभी का दिवा स्वप्न था कि एक ऐसी पत्रिक निकले जो पूर्ण रूप से हिंदी साहित्य को समर्पित हो और हम सभी का यह सपना पंडित जी सांतवीं पुण्यतिथि पर साकार हुआ । पत्रिका का प्रकाशन रत्नाकर ,इलाहाबाद द्वारा किया गया है । १८ सितम्बर २०१२ को हिंदुस्तानी एकेडमी इलाहबाद के सभागार में डॉ० सुरेश चन्द्र पाण्डेय (सेवानिवृत्त संस्कृत विभागाध्यक्ष ,इलाहबाद विश्वविद्यालय )कि अध्यक्षता में ज्योतिष कर्मकांड एवं अध्यात्म शोध संसथान द्वारा आयोजित पंडित जी कि पुण्यतिथि कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ,डॉ० गिरिजा शंकर शास्त्री ( संस्कृत विभागाध्यक्ष ,ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज , इलाहबाद ) डॉ० राममुनि पाण्डेय ,पंडित रामकिशोर शास्त्री आदि मूर्धन्य विद्वानों ने "करुणावती" का विमोचन किया ।
........आनंद विक्रम त्रिपाठी ..
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